मानवाधिकार दिवस पर Seeds of Peace India और मुंबई बहाई समुदाय का शांति व एकता संदेश
मुंबई — Seeds of Peace India और मुंबई बहाई समुदाय के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार सुबह, 13 दिसंबर को मानवाधिकार दिवस के उपलक्ष्य में एक विशेष सामुदायिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मानवाधिकार दिवस पूरी दुनिया में 10 दिसंबर को मनाया जाता है। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में लगभग 100 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें Seeds of Peace के पूर्व छात्र (अलुमनी), शिक्षक, अभिभावक, विद्यार्थी और बहाई समुदाय के सदस्य शामिल थे।
कार्यक्रम का उद्देश्य शांति, समानता, बंधुत्व और न्याय जैसे मूल्यों पर चिंतन करना था, जो मानवाधिकारों की जीवंत अभिव्यक्ति हैं। बहाई दृष्टिकोण से मानवाधिकारों की उन्नति को नैतिक और आध्यात्मिक शिक्षा से जोड़ा गया, विशेषकर युवाओं और किशोरों के चरित्र निर्माण पर बल दिया गया, ताकि उनमें न्याय, करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे गुण विकसित हो सकें।
इस कार्यक्रम का संयुक्त रूप से आयोजन Seeds of Peace India के कंट्री डायरेक्टर सागर गांगुर्डे, प्रोग्राम्स मैनेजर उर्मी चंदा तथा मुंबई बहाई समुदाय की नर्गिस गौर द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता विनोद शेट्टी ने संबोधित किया। उन्होंने वैश्विक स्तर पर सत्ता के दुरुपयोग और मानवाधिकारों के क्षरण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मानव गरिमा और न्याय के शासन के बिना स्थायी शांति संभव नहीं है।
कार्यक्रम के दौरान ह्यूमन बिंगो जैसी संवादात्मक गतिविधियों के माध्यम से आपसी जुड़ाव और सौहार्द को बढ़ावा दिया गया। वहीं आइडेंटिटी एक्सरसाइज के जरिए यह समझाया गया कि पहचान कैसे विभाजन का कारण भी बन सकती है और शांति शिक्षा के माध्यम से एकता का माध्यम भी। ये गतिविधियां जूनियर यूथ एम्पावरमेंट प्रोग्राम्स की शिक्षण पद्धतियों पर आधारित थीं, जो 11 से 14 वर्ष के युवाओं में नैतिक सोच, आलोचनात्मक चिंतन और सेवा भावना को विकसित करती हैं।
बहाई दृष्टिकोण को प्रस्तुत करते हुए अधिवक्ता डीजेना सुनावाला ने कहा कि शांति केवल एक सपना नहीं बल्कि एक अनिवार्य वास्तविकता है। उन्होंने युवाओं और जूनियर यूथ की भूमिका को सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का प्रमुख आधार बताया।
कार्यक्रम का समापन Seeds of Peace India के कोर लीडरशिप प्रोग्राम 2025 के स्नातकों के दीक्षांत समारोह और धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने यह संदेश दिया कि संवाद, शिक्षा और एकता के मार्ग पर चलकर ही एक न्यायपूर्ण और शांतिपूर्ण समाज का निर्माण संभव है।



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