बहाई सेंटर मे पार्लियामेंट ऑफ रिलिजन्स का दूसरा संस्करण आयोजित
मुंबई में 27 सितंबर, शनिवार की सुबह मरीन लाइन्स स्थित बहाई सेंटर में मुंबई पार्लियामेंट ऑफ रिलिजन्स का दूसरा संस्करण आयोजित हुआ। यह आयोजन इंटर-रिलिजियस सॉलिडैरिटी काउंसिल, सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ सोसाइटी एंड सेक्युलरिज़्म और बहाई सेंटर द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
इस वर्ष का विषय था “धर्म और सामाजिक चुनौतियाँ”, जिसमें विभिन्न धर्मों और क्षेत्रों से जुड़े विद्वानों व नेताओं ने अपने विचार रखे। पैनल में गांधीवादी विद्वान रजनी बक्शी, शिक्षाविद डॉ. सुरिंदर कौर, प्रभु गोविंद दास (हरे कृष्णा), ताहिरीह महीजा (बहाई प्रतिनिधि), रोशनी शेनाज़ (आध्यात्मिक लेखिका), मुफ़्ती याह्या (इस्लामी विद्वान), फादर गिल्बर्ट डि’लीमा (कैथोलिक पादरी) और स्वामी दयादिपानंद (रामकृष्ण मिशन) शामिल थे। संचालन उर्मी चांदा ने किया।
कार्यक्रम का उद्घाटन प्रभु केशव चंद्र दास (IRSC संयोजक) ने किया। उन्होंने कहा कि असली धर्म सेवा, करुणा, समानता और सत्य पर आधारित है, न कि विभाजन पर। उन्होंने इस वर्ष के विषय की अहमियत बताते हुए सवाल उठाए कि क्या धर्म लैंगिक समानता, LGBTQIA+ समुदाय के अधिकार, और जाति व सामाजिक असमानताओं को तोड़ने में सकारात्मक भूमिका निभा सकता है।
प्रमुख वक्ता रजनी बक्शी ने कहा कि केवल भावना नहीं, बल्कि कर्म ही परिवर्तन ला सकता है। डॉ. सुरिंदर कौर ने मणिपुर जैसी संघर्षग्रस्त जगहों पर महिलाओं की स्थिति पर प्रकाश डाला। प्रभु गोविंद दास ने पर्यावरण और करुणा के संबंध पर बात की। ताहिरीह महीजा ने मानवता की एकता और समानता को आध्यात्मिक नवीकरण से जोड़कर समझाया।
गायिका राधिका सूद नायक ने अपनी मधुर प्रस्तुति से वातावरण को भावपूर्ण बना दिया। रोशनी शेनाज़ ने अच्छे विचार, अच्छे शब्द और अच्छे कर्मों की महत्ता बताई। फादर गिल्बर्ट डि’लीमा ने धर्म को साम्प्रदायिक हिंसा रोकने का साधन बताया। मुफ़्ती याह्या ने परिवार और रिश्तों के महत्व पर ज़ोर दिया। स्वामी दयादिपानंद ने प्रत्येक व्यक्ति के भीतर दिव्यता को पहचानने का संदेश दिया।
करीब 150 प्रतिभागियों, जिनमें छात्र भी शामिल थे, की उपस्थिति में यह आयोजन हुआ। अंत में सॉलिडैरिटी लंच के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ, जिसने शांति, सद्भाव और करुणा के पुल बनाने के संकल्प को और मजबूत किया।
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